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कब्रिस्तान के नाम पर दर्ज हुई बांके बिहारी मंदिर की जमीन, इलाहाबाद हाईकोर्ट में आज पेश होंगे छाता तहसीलदार

उत्तर प्रदेश के वृंदावन में बांके बिहारी जी महाराज मंदिर के नाम से दर्ज जमीन को पहले कब्रिस्तान और फिर पुरानी आबादी में दर्ज करने का मामला काफी सुर्खियों में है. इस मामले में अब इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आज मथुरा की छाता तहसील के तहसीलदार को कोर्ट में तलब किया है. मथुरा की छाता तहसील के तहसीलदार को आज हाईकोर्ट में पेश होकर यह बताना होगा कि बांके बिहारी मंदिर के नाम पर जमीन को पहले कब्रिस्तान और बाद में पुरानी आबादी कैसे दर्ज किया गया.

दरअसल मथुरा के बांके बिहारी मंदिर के नाम दर्ज जमीन को राजस्व अभिलेखों में कब्रिस्तान के नाम दर्ज करने के मामले में आज इलाहाबाद हाईकोर्ट में सनुवाई होनी है. पिछली सुनवाई में न्यायमूर्ति सौरभ श्रीवास्तव की सिंगल बेंच की सुनवाई के दौरान मथुरा की छाता तहसील के तहसीलदार को कोर्ट में तलब होने के आदेश दिए गए थे. ऐसे में आज छाता तहसील के तहसीलदार कोर्ट में पेश होकर बांके बिहारी मंदिर के नाम पर दर्ज जमीन को पहले कब्रिस्तान और बाद में पुरानी आबादी में कैसे दर्ज किया गया उस पर अपना पक्ष रखेंगे.इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शाहपुर गांव के प्लाट 1081 की स्थिति को राजस्व अधिकारी की ओर से समय-समय पर बदलने को लेकर सवाल किया है. इस मामले में श्री बिहारी जी सेवा ट्रस्ट की ओर से याचिका दाखिल की गई है. जिसमें कहा गया है कि प्राचीन काल से ही गाटा संख्या 1081 बांके बिहारी महाराज के नाम से दर्ज था. जिसे 1994 में भोला खान पठान ने राजस्व अधिकारियों की मिली भगत से कब्रिस्तान के नाम दर्ज करा लिया था. जिसकी जानकारी होने पर मंदिर ट्रस्ट ने आपत्ति दाखिल की थी.

बताया जा रहा है कि यह मामला वक्फ बोर्ड तक गया और सात सदस्यीय टीम ने जांच में पाया कि कब्रिस्तान गलत तरीके से दर्ज किया गया है. फिलहाल इसके बावजूद जमीन को बिहारी जी के नाम पर दर्ज नहीं किया गया. जिसे लेकर अब श्री बिहारी जी सेवा ट्रस्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दायर की है.