बांग्लादेश, भारत के पड़ोसी देशों में पिछले एक साल में कई बदलाव आए हैं. मालदीव, श्रीलंका और बांग्लादेश जैसे देशों में राजनीतिक उथल-पुथल देखी गई है और इसका फायदा उठाने की कोशिश चीन लगातार कर रहा है. चीन अपनी लौन नीति के चलते कई देशों में अपनी पकड़ मजबूत कर चुका है. पाकिस्तान को अपने चंगुल में लेने के बाद चीन अब बांग्लादेश पर नजर रखे हुए है.
दूसरी तरफ बांग्लादेश भी भारत का बदल तलाशने की पूरी कोशिश कर रहा है. बांग्लादेश के विदेश सलाहकार तौहीद हुसैन चीन दौरे पर हैं और उनके इस दौरे में चीन से लिए लोन भुगतान की मियाद को बढ़ाना अहम मुद्दों में से एक है. द डेली स्टार के खबर के मुताबिक चीन ने इस पर सहमति भी व्यक्त कर दी है.
बीजिंग चीनी लौन भुगतान के लिए समय सीमा बढ़ाने पर राजी हो गया और ढाका को आश्वासन दिया है कि वह बांग्लादेश के विदेशी ऋण भुगतान के दबाव को कम करने के लिए ब्याज दर कम करने के अनुरोध पर विचार करेगा. जापान, विश्व बैंक और एशियाई डेवलपमेंट बैंक के बाद चीन बांग्लादेश का चौथा सबसे बड़ा ऋणदाता है, जिसने 1975 से अब तक कुल 7.5 अरब डॉलर का लोन चीन को दिया है. बैठक में हुसैन ने चीन से ब्याज दर को 2-3 फीसद से घटाकर 1 फीसद करने की मांग की है, साथ ही अनुरोध किया है कि भुगतान करने के अच्छे रिकार्ड को देखते हुए, लोन चुकाने की अवधि को 20 साल से बढ़ाकर 30 साल कर दिया जाए. खबरों के मुताबिक चीनी ने दोनों ही मांगों पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है.
