Business Khas

Latest news
ਸ਼ੁਭਮਨ ਗਿੱਲ ਦੀ ਕਪਤਾਨੀ ਹੇਠ ਗੁਜਰਾਤ ਟਾਈਟਨਸ ਦੀ ਟੀਮ ਜਿੱਤ ਡਿਪਟੀ ਕਮਿਸ਼ਨਰ ਨੇ ਅਧਿਕਾਰੀਆਂ ਨੂੰ ਲੋਕ ਮਸਲੇ ਪਹਿਲ ਦੇ ਅਧਾਰ 'ਤੇ ਹੱਲ ਕਰਨ ਦੇ ਦਿੱਤੇ ਨਿਰਦੇਸ਼ 5 ਮਈ ਨੂੰ ਹੋਵੇਗੀ ਵੋਟਰ ਸੂਚੀਆਂ ਦੀ ਅੰਤਿਮ ਪ੍ਰਕਾਸ਼ਨਾ  ਜ਼ਿਲ੍ਹੇ ਦੀਆਂ ਮੰਡੀਆਂ 'ਚ ਹੁਣ ਤੱਕ 10 ਹਜ਼ਾਰ ਮੀਟ੍ਰਿਕ ਟਨ ਕਣਕ ਦੀ ਹੋਈ ਆਮਦ 16 ਅਪ੍ਰੈਲ ਨੂੰ ਰਾਜ ਵਿੱਚ ਕੁਝ ਥਾਵਾਂ ਉਤੇ ਮੀਂਹ ਪੈਣ ਦੀ ਸੰਭਾਵਨਾ 17 ਅਪ੍ਰੈਲ ਨੂੰ ਕਪੂਰਥਲਾ ਵਿੱਚ “ਰੇਲ ਰੋਕੋ” ਦਾ ਐਲਾਨ,ਕਿਸਾਨਾਂ ਦਾ ਵੱਡਾ ਐਕਸ਼ਨ ਬਰਨਾਲਾ ਦੇ 6 ਸਕੂਲਾਂ ਨੂੰ ਬੰਬ ਨਾਲ ਉਡਾਉਣ ਦੀ ਧਮਕੀ ਫਿਰੋਜ਼ਪੁਰ ਦੇ ਲਵਿਸ਼ ਗੋਇਲ ਨੇ 10ਵੀਂ ‘ਚ 99.4% ਅੰਕ ਪ੍ਰਾਪਤ ਕੀਤੇ ਬਸਤੀ ਸ਼ੇਖ ਸਤਰਾਂ ਮੁਹੱਲੇ ਵਿੱਚ ਪਾਣੀ ਦੀ ਕਮੀ ਨਾਲ ਲੋਕ ਪਰੇਸ਼ਾਨ ਗੁਰਦੁਆਰਾ ਬਾਬਾ ਜੀਵਨ ਸਿੰਘ ਗੜਾ ਵਿਖੇ ਖਾਲਸੇ ਦਾ ਪ੍ਰਗਟ ਦਿਵਸ ਸ਼ਰਧਾ ਪੂਰਵਕ ਮਨਾਇਆ ਗਿਆ
You are currently viewing सम्पूर्ण फलदाई आलौकिक हवन यज्ञ 23 नवंबर शनिवार रात्रि को

सम्पूर्ण फलदाई आलौकिक हवन यज्ञ 23 नवंबर शनिवार रात्रि को

जालंधर:- मां बगलामुखी धाम गुलमोहर सिटी नज़दीक लमांपिंड चौंक जालंधर में मां बगलामुखी जी के निमित्त सप्ताहिक दिव्य हवन यज्ञ का आयोजन किया गया।

सर्व प्रथम ब्राह्मणो द्वारा मुख्य यजमान बंटू सभरवाल से विधिवत पूजन उपरांत षोडशोपचार पूजन, पंचोपचार पूजन, नवग्रह पूजन करवाकर हवन यज्ञ में आहुतियां डलवाई गई।

सिद्ध मां बगलामुखी धाम के प्रेरक प्रवक्ता नवजीत भारद्वाज जी ने दिव्य हवन यज्ञ पर उपस्थित भक्तों को श्री गुरुनानक देव जी के प्रकटोत्सव पर शुभकामनाएं देते हुए श्री गुरुनानक देव जी द्वारा दिए उपदेशों को समझने और अपनाने की जरूरत पर ध्यान देने के लिए कहा।

नवजीत भारद्वाज जी ने कहा कि गुरुवाणी में लिखा है ‘पवन गुरु, पानी पिता, माता धरत महत’। इन शब्दों में हवा को गुरु माना गया इसी प्रकार गुरु के ज्ञान बिना आत्मा निर्जीव हैं। यह भी सच है कि पवन (आक्सीजन) ही हमारे शरीर में जीवन भरती है। पानी को श्री गुरु नानक देव जी ने पिता कहा है और धरती को महान माता जिससे अन्न आदि देकर धरती अपनी गोद में जीवों को पालती है। धरती हमारी बड़ी मां की तरह है जो सारी हमारी जरूरतें पूरी करती है और हमारी मां की तरह ध्यान रखती है। पानी हमारे लिए ऐसा है जैसे पिता और धरती हमारी मां जैसी है जैसे माता-पिता के मिलन से आगे जीवों का जन्म होता है। जैसे मां अपनी कोख में बच्चे को पालती है वैसे ही पानी और धरती के मिलन से ही जीवन की उत्पत्ति और पालने का सिलसिला चलता है।

‘पवन गुरु, पानी पिता, माता धरत महत’ इन शब्दों को जीवन में उतारने की जरूरत है। इन शब्दों को जीवन में नहीं उतारने से प्रकृति के साथ हमारी नजदीकी कैसे बनेगी। हमें जहां खुद को कुदरत के साथ फिर से जोडऩा पड़ेगा, वहीं आने वाली पीढिय़ों को भी कुदरत का सम्मान करने व कुदरत के अनुकूल चलने की शिक्षा देनी पड़ेगी।

नवजीत भारद्वाज जी ने कहा कि पर्यावरण बचाने के लिए इससे अच्छा संदेश नहीं मिल सकता। आज पूरी दुनिया को कारोना की महामारी से जूझते हुए मनुष्य को समझ में आ गया है कि प्रकृति का सरंक्षण करना कितना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि आस्था के साथ-साथ हमारे गुरुओं और सभी धर्मों में दिए गए संदेश को धर्म को जीवनशैली बनाए तो निश्चित तौर पर ही हमारा जीवन सार्थक होगा।

नवजीत भारद्वाज ने बताया की 23 नवंबर को श्री काल भैरव जयंती पर विशेष आलौकिक हवन यज्ञ का आयोजन मदिंर परिसर में शाम 6 बजे से प्रभु इच्छा तक किया जाएगा उन्होंने कहा की अधिक जानकारी के लिए मंदिर परिसर में सम्पर्क कर सकते हैं।

इस अवसर पर अमित कुमार, सरोज बाला, रुपम ,सुनीता, अंजू, गुरवीर, प्रिती ,मंजू, प्रिया , रजनी, सोनीया,नरेश,कोमल , कमलजीत, धर्मपालसिंह, निर्मल,अनिल,सागर,दीपक, प्रिंस कुमार, पप्पू ठाकुर, बलदेव सहित भारी संख्या में भक्तजन मौजूद थे।हवन-यज्ञ उपरांत विशाल लंगर भंडारे का आयोजन किया गया।