Business Khas

Latest news
ਸਿੱਖਾਂ ਤੋਂ ਗੁਰੂ ਸਾਹਿਬ ਵੱਲੋ ਬਖਸ਼ੇ ਰਵਾਇਤੀ ਸ਼ਸਤਰਾਂ ਨੂੰ ਖੋਇਆ ਰੌਇਲ ਚੈਲੰਜਰਜ਼ ਬੈਂਗਲੁਰੂ (RCB) ਨੇ ਕ੍ਰਿਕਟ ਜਗਤ ਵਿੱਚ ਉਹ ਕਾਰਨਾਮਾ ਕਰ ਦਿਖਾਇਆ ਸ਼ਹੀਦ ਬਾਬਾ ਖੁਸ਼ਹਾਲ ਸਿੰਘ ਸੀਨੀਅਰ ਸੈਕੰਡਰੀ ਸਕੂਲ ਲਾਂਬੜਾ ਵਿਖੇ ਕਰਵਾਏ ਗਏ ਸ਼ਬਦ ਗਾਇਨ ਮੁਕਾਬਲੇ ਪੰਜਾਬ ਦੇ ਸਕੂਲਾਂ ਵਿਚ ਗਰਮੀ ਦੀਆਂ ਛੁੱਟੀਆਂ ਦਾ ਹੋਇਆ ਐਲਾਨ ਅਗਲੇ 3 ਘੰਟਿਆਂ 'ਚ ਤੂਫਾਨ ਨੂੰ ਲੈ ਕੇ ਹਾਈ ਅਲਰਟ... ਨਗਰ ਨਿਗਮ ਚੋਣਾਂ ਦੀ ਤਸਵੀਰ ਨੇ ਰਾਜ ਦੇ ਰਾਜਨੀਤਿਕ ਦ੍ਰਿਸ਼ ਨੂੰ ਸਪੱਸ਼ਟ ਐਨਕਾਂ ਜਾਂ ਸਮਾਨ ਉੱਚ-ਤਕਨੀਕੀ ਐਨਕਾਂ ਜਮ੍ਹਾਂ ਕਰਾਉਣ ਦੇ ਨਿਰਦੇਸ਼ दिल्ली के हौज खास में AC ब्लास्ट से भीषण आग, रिटायर्ड IAS अधिकारी की मौत ਸੁਸ਼ੀਲ ਰਿੰਕੂ ਨੇ ਕੇਵਲ ਸਿੰਘ ਢਿੱਲੋਂ ਨੂੰ ਭਾਜਪਾ ਪੰਜਾਬ ਸੂਬਾ ਪ੍ਰਧਾਨ ਨਿਯੁਕਤ ਹੋਣ 'ਤੇ ਵਧਾਈ ਦਿੱਤੀ पांचवां समर कैंप 1 जून से 30 जून तक आयोजित
You are currently viewing KBC 17:  10 साल के बच्चे ने अमिताभ से की बदतमीजी, अति-आत्मविश्वास से हुआ ये बुरा हाल

KBC 17: 10 साल के बच्चे ने अमिताभ से की बदतमीजी, अति-आत्मविश्वास से हुआ ये बुरा हाल

कौन बनेगा करोड़पति सीजन 17 के एक एपिसोड ने पिछले दो दिनों में सोशल मीडिया पर तहलका मचा दिया है. इसकी वजह बना है गुजरात का रहने वाला 10 साल का ईशित भट्ट… वह इस शो में बतौर चाइल्ड कंटेस्टेंट शामिल हुआ था. अमिताभ बच्चन के सामने बैठा यह नन्हा कंटेस्टेंट कॉन्फिडेंस से भरा हुआ था. लेकिन इसी आत्मविश्वास में उसने बिग बी के साथ जो बरताव किया, उसने उसे रातों-रात इंटरनेट पर ‘भारत का सबसे नापसंद बच्चा’ बना दिया.
ईशित भट्ट पांचवीं क्लास में पढ़ता है. उसने केबीसी में जिस आत्मविश्वास और तेज़ी से सवालों का जवाब दिया, उसने सारे दर्शकों का ध्यान तो खींचा, लेकिन बहुतों को उसका रवैया पसंद नहीं आया. इसके बाद कई लोगों ने उसे ट्रोल करना शुरू कर दिया.
‘ओवरकॉन्फिडेंट किड’ का वायरल एपिसोड
शो में ईशित की जल्दबाजी और उत्साही लहजा कई दर्शकों को खटक गया. उसने अमिताभ बच्चन से घमंड भरे लहजे में कहा कि उसे सारे नियम पता हैं और वह इसे दोहराए नहीं, बल्कि सीधे प्रश्न पर आएं. इतना ही नहीं, जब सवाल स्क्रीन पर दिखाने की बारी आई, तो उन्होंने लगभग आदेशा देने जैसे लहजे में कहा कि ‘जल्दी ऑप्शंस आत्मविश्वास की मूरत ईशित ने बेहद घमंडी ढंग से शुरुआती चार सवालों के जवाब तो फटाफट दे दिए. लेकिन ईशित के इस ‘स्पीड रन’ में आखिरकार पांचवे सवाल पर ब्रेक लग गया. अमिताभ बच्चन ने उससे पूछा कि ‘वाल्मीकि रामायण के पहले कांड का नाम क्या है?’ अब तक बिना ऑप्शन देखे ही सारे सवालों के जवान देने वाला ईशिप यहां पर आकर फंस गया. पहले तो उसने ऑप्शन दिखाने की मांग की. इसके ऑप्शन थे – A: बालकांड, B: अयोध्याकांड, C: किष्किंधा कांड , D: युद्धकांड…
हालांकि ईशित तो ईशित था… कॉन्फिडेंस से भरपूर… उसने एक बार फिर बिना सोचे-विचारे जवाब दिया. ‘ऑप्शन B…’ अमिताभ जब उससे अपने जवाब पर विचार करने को कहते हैं तो वह जवाब देता है, ‘सर, एक क्या उसमें चार लॉक लगाइए, लेकिन लॉक कर दीजिए.’ फिर क्या था… यह जवाब गलत था और ईशित खाली हाथ ही शो से बाहर हो गया.
सोशल मीडिया पर कई यूजर्स ईशित को ट्रोल करते हुए उसके खाली हाथ जाने पर खुशी जताने लगे. कुछ लोगों ने बच्चे को ट्रोल किया, वहीं कई यूजर्स ने कहा कि गलती बच्चे की नहीं, बल्कि उसकी परवरिश की है. एक यूजर ने लिखा, ‘बहुत सुकून वाला अंत! गलती बच्चे की नहीं, पैरेंट्स की है. अगर आप अपने बच्चों को विनम्रता और धैर्य नहीं सिखाते, तो वे ऐसे ही ओवरकॉन्फिडेंट बन जाते हैं.’ इस पूरे विवाद के बीच सोशल मीडिया पर एक नया शब्द ट्रेंड करने लगा… ‘Six Pocket Syndrome’ एक यूजर ने दावा किया कि ईशित भट्ट का व्यवहार इसी मनोवैज्ञानिक और सामाजिक स्थिति का परिणाम है.
क्या है Six Pocket Syndrome?
‘सिक्स पॉकेट सिन्ड्रॉम’ एक ऐसी सामाजिक स्थिति को दर्शाता है, जिसमें एक अकेला बच्चा छह कमाने वालों के सहारे पलता है… दो माता-पिता, दो नाना-नानी और दो दादा-दादी…
इस तरह का पारिवारिक ढांचा सबसे पहले चीन की ‘वन चाइल्ड पॉलिसी’ के दौरान सामने आया था. वहां परिवार की संरचना को ‘4-2-1 मॉडल’ कहा गया… यानी चार दादा-दादी, दो माता-पिता और एक बच्चा.
इस ढांचे में बच्चा परिवार का केंद्र बन जाता है. सभी वयस्क सदस्य उसकी हर मांग को पूरा करने की कोशिश करते हैं… खिलौने, कपड़े, पसंदीदा खाना, हर छोटी इच्छा बिना किसी देरी के पूरी हो जाती है. इसका नतीजा यह होता है कि बच्चे में धैर्य खत्म होता जाता है. उसमें आत्म-केंद्रितता और असंवेदनशीलता जैसी प्रवृत्तियां विकसित होने लगती हैं. इन्हें चीन में ‘Little Emperor Syndrome’ यानी ‘छोटे सम्राट का सिंड्रोम’ भी कहा गया… ऐसे बच्चे जो हर चीज तुरंत चाहते हैं और ‘ना’ सुनने के आदी नहीं होते.
भारत में कैसे पहुंचा यह ट्रेंड?
भारत में भी शहरी और एकल परिवारों में यह प्रवृत्ति बढ़ रही है. अक्सर एक या दो बच्चे होने के चलते पूरा परिवार खासकर दादा-दादी और माता-पिता अपना सारा प्यार-दुलार और संसाधन एक ही बच्चे पर केंद्रित कर देते हैं. बच्चे को हर वक्त महत्व और सुविधा मिलने की आदत हो जाती है, जिससे उनमें विनम्रता और सहनशीलता की कमी देखी जाती है.
सोशल मीडिया पर कई लोगों ने कहा कि ईशित भट्ट इसका उदाहरण हैं… उनका कहना है कि ‘वह दोषी नहीं, बस एक ऐसे सिस्टम का नतीजा हैं जो बच्चों को जरूरत से ज्यादा लाड़-प्यार देता है.’