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देना गरिमामयी हो तो लेना भी महिमामयी हो: नवजीत भारद्वाज

जालंधर, मां बगलामुखी धाम गुलमोहर सिटी नज़दीक लमांपिंड चौंक जालंधर में श्री शनिदेव महाराज जी के निमित्त सप्ताहिक दिव्य हवन यज्ञ का आयोजन मदिंर परिसर में किया गया।

सर्व प्रथम ब्राह्मणो द्वारा मुख्य यजमान बलजिंदर सिंह से विधिवत वैदिक रिती अनुसार पंचोपचार पूजन, षोडशोपचार पूजन, नवग्रह पूजन उपरांत सपरिवार हवन-यज्ञ में आहुतियां डलवाई गई।

सिद्ध मां बगलामुखी धाम के प्रेरक प्रवक्ता नवजीत भारद्वाज जी ने दिव्य हवन यज्ञ पर उपस्थित प्रभु भक्तों को रामचरित मानस में भगवान श्रीराम के वनवास के समय का एक बेहद मार्मिक प्रसंंग सुनाते हुए कहा कि यह प्रसंग केवट की भक्ति और श्रीराम की करुणा को बताता है। केवट अपने तर्कों से प्रभु को भी निरुत्तर कर देते हैं तथा भक्त वत्सल श्रीराम उन पर अनन्य कृपा बरसाते हैं।

श्रीराम, लक्ष्मण और सीता चौदह वर्ष के वनवास के लिए अयोध्या से निकलकर गंगा नदी के किनारे पहुंचते हैं, जहां उन्हें केवट मिलता है। श्रीरामचरित मानस में लिखा है कि-

नवजीत भारद्वाज जी ने प्रसंग को विराम लगाते हुए इस प्रसंग का अर्थाता समझाया कि मानो भगवान हमें सीख दे रहे हैं कि देने वाला चाहे जितना भी अधिक दे परंतु यह सोचे कि मैंने कुछ नहीं दिया है तभी उसका देना सफल होता है और लेने वाला कम होने पर भी समझे कि नहीं-नहीं बहुत अधिक दिया हैं। तभी उसका लेना सफल होता हैं। अर्थात् देना गरिमामयी हो तो लेना भी महिमामयी हो।

इस अवसर पर अमरेंद्र कुमार शर्मा,रिंकू सैनी, रोहित भाटिया,बावा खन्ना, विनोद , सुक्खा अमनदीप,चेतन अरोडा, अवतार सैनी,गौरी केतन शर्मा,सौरभ ,मोहित राणा,सौरभ अरोडा, नरेश, रजेश महाजन ,अमनदीप शर्मा, गुरप्रीत सिंह, विरेंद्र सिंह, अमन शर्मा,वरुण,विवेक शर्मा, नितिश, भोला शर्मा,गुलजार, अमृतपालसिंह,जानू थापर,अमित शर्मा, हंसराज,संदीप शर्मा, दीपक कुमार, अश्विनी शर्मा ,भोला शर्मा, जगदीश,गौरव जोशी, प्रशांत,सौरभ मल्होत्रा,सुभाष डोगरा, ऋषभ कालिया, प्रिंस कुमार, सहित भारी संख्या में भक्तजन मौजूद थे। हवन-यज्ञ उपरांत विशाल लंगर भंडारे का आयोजन किया गया।