इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वाराणसी के ज्ञानवापी में विवादित परिसर स्थित वुजूखाना का भी सर्वे कराने की मांग में दाखिल पुनरीक्षण याचिका को विचारणीय मानते हुए अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी सहित अन्य विपक्षियों को नोटिस जारी करते हुए सभी से जवाब दाखिल करने को कहा है। कोर्ट ने वुजूखाना का एएसआई से वैज्ञानिक सर्वे कराने की मांग को विचारणीय माना है। यह आदेश न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल ने वाराणसी की अदालत में श्रृंगार गौरी का मुकदमा दाखिल करने वाली राखी सिंह की पुनरीक्षण याचिका पर सुनवाई करते हुए बुधवार को दिया।
ज्ञानवापी में वुजूखाना को छोड़कर पूरे परिसर का तीन महीने तक कोर्ट के आदेश पर एएसआई ने सर्वे किया था। वुजूखाने को कोर्ट के ही आदेश पर सील किया गया था। इसके कारण सर्वे नहीं किया जा सका है। अब वहां पर भी सर्वे हिन्दू पक्ष चाहता है। कोर्ट ने वादी पक्ष से पूछा था कि जिला जज के आदेश में क्या कमी है। राखी सिंह की ओर से कहा गया कि सर्वे से विवादित परिसर को कोई नुकसान नहीं होगा क्योंकि एएसआई वैज्ञानिक तरीके से सर्वे कर रहा है। याचिका में कहा गया है कि श्रृंगार गौरी केस के निस्तारण के लिए वुजूखाना का भी सर्वे कराया जाना बेहद जरूरी है।
कहा गया है कि एएसआई ने जिस तरह विवादित परिसर के अन्य हिस्सों का सर्वे किया है, उसी तरह उसे वुजूखाना का भी सर्वे करने का निर्देश दिया जाए। दलील दी गई कि वुजूखाना के सर्वे से 15 अगस्त 1947 को जो स्थिति थी, उसका सही सही पता चलेगा। वुजूखाना में शिवलिंग आकृति मिलने के दावे के बाद वाराणसी के सिविल जज के आदेश पर वुजूखाना को मई 2022 में सील कर दिया गया था। याचिका के माध्यम से वाराणसी के जिला जज की कोर्ट के गत 21 अक्टूबर के आदेश की वैधानिकता को चुनौती दी गई है।
