उत्तर प्रदेश, उत्तर प्रदेश के संभल संभल जिले में अब एक और बावड़ी मिली है। यह बावड़ी गणेशपुर में स्थित है और इसमें चारों तरफ बने कमरे और सीढ़ियां खंडहर में तब्दील हो रही हैं। यह बावड़ी लगभग चार या साढ़े चार सौ साल पुरानी बताई जा रही है। संभल जिला प्रशासन की टीम ने गणेशपुर की इस बावड़ी का निरीक्षण किया और वीडियोग्राफी-फोटोग्राफी की। जल्द ही संभल डीएम राजेन्द्र पैंसिया को इसकी रिपोर्ट सौंपी जा सकती है।
माना जा रहा है कि यह बावड़ी लगभग तीन सौ एकड़ एरिया में फैली हुई है। अब तक मिली बावड़ी में यह सबसे अद्भुत और विशाल बावड़ी है।तकरीबन 20 बीघा क्षेत्र में फैली इस नई बावड़ी के चारों तरफ करीब 100 से ज्यादा कमरे बने हुए हैं, जो जर्जर हालत में हैं। प्रशासन ने अब इसका इतिहास खंगालना शुरू कर दिया है। इस बावड़ी में मनोकामना मंदिर है। इसमें शिव और बांके बिहारी के साथ साथ तीन मंदिर हैं। बावड़ी में 32 कुएं हैं, जिनमें मलबा भरा हुआ है। इस वजह से ये कुएं कुछ विलुप्त से होने लगे हैं। जानकारी के मुताबिक इन मंदिरों और बावड़ी का निर्माण आलमपुर गुधिया गांव के रहने वाले पीएसी के रिटायर्ड डीआईजी के पुरखों ने 1844 में कराया था।
