Business Khas

Latest news
ਐਮ.ਪੀ. ਅਸ਼ੋਕ ਕੁਮਾਰ ਮਿੱਤਲ ਵੱਲੋਂ ਜਲੰਧਰ ਵਿੱਚ 1.50 ਕਰੋੜ ਰੁਪਏ ਦੇ ਵਿਕਾਸ ਕਾਰਜਾਂ ਦਾ ਉਦਘਾਟਨ ਅਤੇ ਨੀਂਹ ਪੱਥਰ ਕਾਂਗਰਸ ਕਮੇਟੀ ਦੇ ਨਵ- ਨਿਯੁਕਤ ਪ੍ਰਧਾਨ ਸ.ਪ੍ਰਗਟ ਸਿੰਘ ਕਾਂਗਰਸ ਭਵਨ ਜਲੰਧਰ ਵਿਖੇ प्रागपुर मंडल के बाबा बुड्ढा जी एंक्लेव में बैठक आयोजित, स्थानीय निवासियों ने उत्साहपूर्वक लिया भाग 40-45 साल बाद सुधरेगी रास्ता मोहल्ला की नालियों की दशा, मेयर वनीत धीर ने दी बड़ी राहत ਅਜੈ ਦੇਵਗਨ ਦੇ ਜੁਹੂ ਸਥਿਤ ਬੰਗਲੇ ’ਤੇ BMC ਦੀ ਕਾਰਵਾਈ, ਨਾਜਾਇਜ਼ ਉਸਾਰੀ ਦੇ ਦੋਸ਼ਾਂ ਹੇਠ ਕੁਝ ਹਿੱਸੇ ਢਾਹੇ ਪੇਸ਼ੀ ਤੋਂ ਠੀਕ ਪਹਿਲਾਂ ਲੰਡਨ ਰਵਾਨਾ ਹੋਏ ਧਰੁਵ ਰਾਠੀ, ਅਦਾਲਤ ਵੱਲੋਂ ਵਾਰੰਟ ਜਾਰੀ ਸੜਕ ਪਾਰ ਕਰ ਰਹੀ ਮਹਿਲਾ ਨੂੰ ਟਰੱਕ ਨੇ ਕੁਚਲਿਆ; ਮੌਕੇ ‘ਤੇ ਮੌਤ ਰੂਸ ਤੋਂ ਤੇਲ ਖਰੀਦਣ ‘ਤੇ ਨਹੀਂ ਲੱਗੇਗਾ ਟੈਰਿਫ ਅਮਰੀਕਾ ਨੇ ਭਾਰਤ ਨੂੰ ਦਿੱਤੀ ਵੱਡੀ ਰਾਹਤ; ਟਰੰਪ ਬੋਲੇ- ਇਹ ਸਾਡੇ ਕੌਮੀ ਹਿੱਤ ‘ਚ ਮੁਸਕਾਨ-ਸਾਹਿਲ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਰਵਿਤਾ ਅਤੇ ਅਮਰਦੀਪ ਨੂੰ ਵੀ ਮੌਤ ਦੀ ਸਜ਼ਾ
You are currently viewing नागा साधु क्यों नहीं कटवाते अपने बाल,

नागा साधु क्यों नहीं कटवाते अपने बाल,

प्रयागराज, नागा साधुओं की जींदगी के रहस्यों के बारे में जानना चाहता है. नागा साधुओं के बालों के प्रति भी लोगों का आकर्षण होता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि नागा साधु अपने बाल क्यों नहीं कटवाते? वे अपने बाल क्यों बढ़ने देते हैं . आइए इसके पीछे की वजह जानते हैं. दरअसल, बाल न कटवाना सांसारिक बंधनों, इच्छाओं और भौतिक सुखों को त्यागने का प्रतीक माना जाता है. बाल न कटवाना नागा साधुओं की तपस्या और साधना का अहम हिस्सा माना जाता है. नागा साधु शिव के उपासक होते हैं. भगवान शिव की जटाएं लंबी हैं. नागा साधु भगवान महादेव की पूजा करते हैं. भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए वे अपने बाल लंबे रखते हैं.

नागा साधु बनने की प्रक्रिया बहुत लंबी और कठिनाइयों भरी होती है. नागा साधु बनने में 12 साल का समय लगता है. नागा साधु बनने के तीन चरण होते हैं. पहले चरण में नागा साधु बनने वाले को महापुरुष, दूसरे में अवधूत और तीसरे चरण में दिगम्बर माना जाता है. जब कोई व्यक्ति नागा साधु बनता है तो पहली बार उसके बाल काटे जाते हैं. इसके बाद वह जीवन भर अपने बाल नहीं कटवाता.

चार प्रकार के नागा साधु होते हैं. राजेश्वर नागा, खूनी नागा, बर्फानी नागा और खिचड़ी नागा. प्रयागराज के कुंभ में जिन नागाओं को दिक्षा दी जाती है उन्हें राजेश्वर नागा साधु कहा जाता है. राजेश्वर नागा साधुओं की संन्यास के बाद राजयोग प्राप्त करने की इच्छा होती है. उज्जैन कुंभ में जिन नागा साधुओं को दिक्षा दी जाती है उन्हें खूनी नागा कहा जाता है.  ये नागा बहुत आक्रामक स्वभाव के होते हैं. जिन नागाओं को हरिद्वार में दिक्षा दी जाती है उन्हें बर्फानी नागा साधु कहा जााता है. इन नागाओं का स्वाभाव बहुत शांत होता है. जिन नागाओं को नासिक कुंभ में दिक्षा दी जाती है उन्हें खिचड़ी नागा साधु कहा जाता है.