मुंबई,, अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने बुधवार सुबह मुंबई में अदाणी समूह के चेयरमैन गौतम अदाणी और टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन से मुलाकात की।
इसके बाद वह गुजरात के जामनगर के लिए रवाना हुए। वहां वह रिलायंस इंडस्ट्रीज की एक ही स्थान पर स्थित दुनिया की सबसे बड़ी तेल रिफाइनरी के साथ ही समूह द्वारा विकसित किए जा रहे वनतारा और बड़े ऊर्जा विनिर्माण केंद्रों का दौरा करेंगे।
सूत्रों ने बताया कि मंगलवार दोपहर मुंबई पहुंचे रुबियो ने सबसे पहले अदाणी और उसके बाद चंद्रशेखरन से मुलाकात की।
दोनों पक्षों ने इन मुलाकात का ब्योरा जारी नहीं किया।
अदाणी भारत के सबसे बड़े कारोबारी समूहों में से एक का नेतृत्व कर रहे हैं। समूह का कारोबार बंदरगाह, हवाई अड्डा, ऊर्जा, लॉजिस्टिक और बुनियादी ढांचा सहित कई क्षेत्रों में फैला हुआ है। समूह नवीकरणीय ऊर्जा और विनिर्माण कारोबार का भी विस्तार कर रहा है।
चंद्रशेखरन टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी टाटा संस की अगुवाई कर रहे हैं। समूह वाहन, इस्पात, सूचना प्रौद्योगिकी, विमानन, इलेक्ट्रॉनिक्स और अत्याधुनिक विनिर्माण क्षेत्रों से जुड़ा है। भारत के वैश्विक प्रौद्योगिकी और विनिर्माण आपूर्ति श्रृंखला में अपनी भूमिका बढ़ाने के प्रयासों के बीच टाटा समूह सेमीकंडक्टर और बैटरी प्रौद्योगिकी में निवेश कर रहा है।
रुबियो के जामनगर दौरे के दौरान रिलायंस के औद्योगिक परिसर पर विशेष ध्यान होगा। इस परिसर में एक ही स्थान पर स्थित दुनिया की सबसे बड़ी तेल रिफाइनरी है। इसकी कुल प्रसंस्करण क्षमता करीब 14 लाख बैरल प्रतिदिन है।
इस परिसर में वनतारा भी है। यह वन्यजीवों के बचाव, उपचार और पुनर्वास की पहल है। इसे अनंत अंबानी के नेतृत्व में रिलायंस इंडस्ट्रीज और रिलायंस फाउंडेशन ने शुरू किया है। 3,500 एकड़ से अधिक क्षेत्र में फैला यह केंद्र घायल, संकटग्रस्त और बचाए गए पशुओं की देखभाल और पुनर्वास के साथ वन्यजीव संरक्षण पर काम करता है।
जामनगर परिसर का एक अन्य प्रमुख हिस्सा रिलायंस का प्रस्तावित नवीन ऊर्जा विनिर्माण केंद्र, धीरूभाई अंबानी ग्रीन एनर्जी गीगा कॉम्प्लेक्स है। 5,000 एकड़ से अधिक क्षेत्र में फैली इस परियोजना में सौर फोटोवोल्टिक मॉड्यूल, बैटरी ऊर्जा भंडारण, हरित हाइड्रोजन के लिए इलेक्ट्रोलाइजर, ईंधन सेल और बिजली इलेक्ट्रॉनिक्स बनाने वाली इकाइयां स्थापित करने की योजना है।
ये निवेश रिलायंस के चेयरमैन मुकेश अंबानी की उस रणनीति का हिस्सा हैं, जिसके तहत समूह अपने स्थापित तेल शोधन और पेट्रोरसायन कारोबार के साथ बड़ा एकीकृत स्वच्छ ऊर्जा कारोबार स्थापित करना चाहता है। इन इकाइयों का उद्देश्य भारत के ऊर्जा बदलाव को समर्थन देना और स्वच्छ ऊर्जा उपकरणों के आयात पर निर्भरता घटाना है।
